To NRI’s in distant lands…

NRI Poem
ना इधर के रहे
ना उधर के रहे
बीच में लटकते रहे

ना India को भुला सके
ना videsh को अपना सके
NRI बन के काम चलाते रहे

ना हिन्दी को छोड़ सके
ना अंग्रेजी को पकड़ सके
देसी accent में गोरो को
confuse करते रहे

ना Christmas tree बना सके
ना बच्चो को समझा सके
दिवाली पर Santa बनके तोहफे बाँटते रहे

ना shorts पहन सके
ना सलवार कमीज़ छोड़ सके
Jeans पर कुरता पहेन कर इतराते रहे

ना नाश्ते में Donut खा सके
ना खिचड़ी कढी को भुला सके
Pizza पर मिर्च छिड़ककर
मज़ा लेते रहे

ना गरमी को भुला सके
ना Snow को अपना सके
खिड़की से सूरज को
Beautiful Day कहते रहे

अब आयी बारी
Mumbai/Pune/Delhi
जाने की तो
हाथ में mineral पानी की बोतल लेकर चलते रहे

लेकिन वहां पर………….

ना भेल पूरी खा सके
ना लस्सी पी सके
पेट के दर्द से तड़पते रहे
तिरफला और डाइज़िंन
से काम चलाते रहे

ना मच्छर से भाग सके
ना खुजली को रोक सके
Cream से दर्दों को छुपाते रहे

ना इधर के रहे
ना उधर के रहे
कमबख्त कहीं के ना रहे

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